चंद्रयान-2 क्या है? चंद्रयान-2 के बारे में 10 तथ्य

क्या अभी तक आपको चंद्रयान-2 क्या है, इसके बारे में नहीं पता है, तो मैं आपको पूरी जानकारी देने वाला हूं, और बताऊंगा कि क्यों यह भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण है। आपको बता दें कि इसरो ने चंद्रयान-2 अप्रैल 2018 में लांच किया था। लेकिन कुछ कारणों की वजह से यह बार-बार स्थगित हो रहा था। तीन बार स्थगित होने के बाद यह चंद्रयान-2 सेटलाइट 15 जुलाई 2019 को रात 2:00 बजे लांच हुआ।

चंद्रयान-2 क्या है?

चंद्रयान-2 क्या है

चंद्रयान-2 अब तक भारत का सबसे बड़ा कदम होने वाला था और इसको चांद के उस सतह पर उतारना था जहां पर अभी तक किसी भी देश नहीं गया है। चंद्रयान-2 चंद्रमा पर भारत का दूसरा मिशन होने वाला था। इससे पहले 2008 में भारत ने चंद्रयान मिशन लॉन्च किया था। चंद्रयान मिशन ने सिर्फ चंद्रमा की परिक्रमा की थी। लेकिन यह चंद्रयान 2 मिशन चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारने वाला था।

इसरो का अनुमान था कि चंद्रयान 2 मिशन चंद्रमा पर 7 सितंबर को चांद पर उतरेगा। इस मिशन को लेकर पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हुई थी और आपको बता दें कि भारत में भी सभी लोग इस मिशन के लिए बहुत उत्साहित थे। चंद्रयान 2 मिशन के लिए सभी काम भारत में ही पूरे किए गए थे और इस अभियान के तीन माड्यूल्स है।

  1. लैंडर
  2. ऑर्बिटर
  3. रोवर

इसरो के माने तो लेंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा गया था। विक्रम साराभाई की वजह से लेंडर का नाम विक्रम रखा गया है। इसके अलावा इसका पूरा वजन 3.8 टन होने वाला है और इसरो के अनुसार इसकी लगभग लागत 603 करोड रुपए है।

इसरो ने कहा कि चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी हिस्से में उतरने वाला था और जैसे कि मैंने बताया इससे पहले किसी भी देश इस जगह पर नहीं गया है और यह भारत के लिए यह बहुत मुश्किल क्षण था। क्योंकि भारत ने इससे पहले ऐसा नहीं किया था।

इसके अलावा इसरो ने कहा था कि अच्छी लैंडिंग के लिए वहां पर समतल सतह और प्रकाश मिलने वाला था और पर्याप्त सौर ऊर्जा उस जगह पर मिलेगी। इसके अलावा कुछ लोगों का कहना था कि वहां पर पानी और खनिज मिलने की उम्मीद बहुत ज्यादा थी।

इसी तरह चंद्रयान 2 मिशन के द्वारा इसरो चांद के ऊपर मैग्निशियम, कैलशियम और लोहे जैसे खनिजों को खोजने के प्रयास करना चाहता था और चांद के ऊपर पानी होने के संकेतों के भी तलाश करना चाहता था। इससे पहले इसरो के मुताबिक लैंडिंग के बाद 4 घंटे बाद रोवर को निकलने में समय लगेगा और 15 मिनट बाद लैंडिंग की सारी तस्वीरें इसरो के पास आ जाएगी।

चंद्रयान-2 के बारे में कुछ तथ्य

  1. यदि अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह के दक्षिण जो के करीब उतारता तो भारत नया इतिहास रचने वाला पहला देश बन जाता।
  2. इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस ने भी चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाई है। लेकिन कभी भी किसी भी देश ने दक्षिण ध्रुव पर लैंडिंग नहीं कराई है, जो कि भारत इस मिशन के द्वारा करना चाहता था, लेकिन केवल 2.1 किलोमीटर दूर रह गया।
  3. भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए बेंगलुरु पहुंचे थे।
  4. जब चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला था तब अचानक से लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया।
  5. चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान मिशन 47 दिनों के बाद असफल रहा।
  6. इसरो के चीफ डॉक्टर सिवान ने कहा कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का प्रयोग भारत के लिए पहली बार था और यह आधुनिक और साइंटिफिक उपकरण से लैस थे। इससे पहले चंद्रयान-1 में सिंपल आर्बिटर को सफलता से चंद्रमा पर पहुंचाया था
  7. चंद्रमा पर जाने के लिए नई जगह इस लिए चुनी गई थी, क्योंकि नई चीजें सामने आ सके, क्योंकि पुराने जगह पर फिर एक बार जाने का कोई फायदा नहीं था, यह बात चेयरमैन डॉक्टर सिवान ने कहीं थी।
  8. लैंडर का मुख्य काम चंद्रमा की सतह पर जाकर विश्लेषण करना था और वहां के चट्टानों का और सभी जगहों का सेल्फी लेकर भेजना था, लेकिन अब वह संभव नहीं है।
  9. चंद्रयान-2 साइंटिफिक मिशन था, इसे बनने में कुल 11 साल लगे थे।
  10. केवल आर्बिटर सफल रहा और लैंड, रोवर असफल रहे गए।

एक्सपर्ट लोगों का कहना है कि जो भी अंतरिक्ष विज्ञान को समझते हैं, वह जरूर भारत के इस प्रयास को प्रस्थान करेंगे, क्योंकि भारत ने जो किया है, वह किसी से कम नहीं है।

हम यही आशा करते हैं कि आगे आने वाले समय में भारतीय वैज्ञानिक मिलकर अंतरिक्ष की दुनिया में एक नई ऊंचाई हासिल करेंगे और चंद्रयान-2 के अलावा और भी अन्य बहुत सारे मिशन सफलतापूर्वक हासिल करेंगे।

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FAQs

विक्रम लैंडर का क्या हुआ?

नासा ने ट्वीट करते हुए कहा कि उसके लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर का मलबा ढूंढ लिया है, जो कि क्रश साइड से 750 मीटर दूरी में मिला है।

भारत कब चांद पर गया था?

भारत का पहला चांद पर मिशन चंद्रयान-1 था जिसे 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया गया था

चांद पर जाने में कितना दिन लगता है?

धरती से चांद कुल 386,243 किलोमीटर दूर है और अधिकांश चंद्र मिशनों को चांद पर पहुंचने के लिए लगभग 3 दिन लगते हैं।

चंद्रयान 3 कब लॉन्च होगा?

Chandrayaan-2 के बाद भारत ने अपना हौसला नहीं खोया है और अब chandrayaan-3 अगस्त 2022 में लांच होगा।

चांद पर जाने वाला पहला आदमी कौन था?

चांद पर जाने वाला पहला आदमी नील आर्मस्ट्रांग था जिन्होंने 20 जुलाई 1916 को

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