रावण के माता-पिता का नाम क्या था?

हिंदू होने के नाते भारतीय लोगों को रामायण से जुड़ी बहुत सारे भगवान और राक्षसों के नाम याद होते हैं, उसमें से एक का नाम रावण था। लेकिन क्या आपको पता है, रावण के पिता का नाम, रावण के माता का नाम और रावण के परिवारों के सदस्यों का नाम। वाल्मीकि रामायण के अलावा रावण से संबंधित जानकारियां हिंदू धर्म के अनेक ग्रंथों में मिल जाएगी।

रावण के माता-पिता का नाम
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खास करके दक्षिण भारत की रामायण में रावण के चरित्र के हर जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। जिसे पढ़कर हमें रावण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली है। आपको बता दें कि श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण, पद्मपुराण, आनंद रामायण, महाभारत, दशावतारचरित्र आदि हिंदू ग्रंथों में रावण का उल्लेख है।

रावण के माता-पिता का नाम

रावण के पिता का नाम विश्रवा है। विश्रवा पुलस्त्य ऋषि के बेटे हैं और ब्रह्मा जी उनके संबंध में परदादा लगते है। रावण के पिता विश्रवा की पहली पत्नी भारद्वाजा की पुत्री देवांगना थी और इन दोनों का पुत्र भगवान कुबेर थे।

इसी तरह विश्रवा की दूसरी पत्नी का नाम कैकसी थी और कैकसी, दैत्यराज सुमाली की पुत्री थी। इस वजह से संबंध में रावण की मां कैकसी थी। रावण के अलावा विश्रवा और कईकसी को और तीन संताने थे, जिनके नाम कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खर, कुंभीनी, अहिरावण, दूषण और कुबेर जी रावण के सगे भाई बहन नहीं थे।

रावण का जन्म और बचपन

आपको हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु के बारे में पता होगा। आपको बता दें कि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई रामायण महाकाव्य, पद्मपुराण तथा  श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष दूसरे जन्म में रावण और हिरण्यकशिपु अपने दूसरे जन्म में कुंभकरण के रूप में पैदा हुए थे। 

ऐसा कहा जाता है कि रावण की मां कैकसी ने अशुभ समय में गर्भ धारण कर लिया था, जिस वजह से कैकसी के गर्भ से रावण और कुंभकरण जैसे खतरनाक और क्रूर स्वभाव वाले राक्षस पैदा हो गए। तुलसीदास जी द्वारा लिखित रामचरितमानस में ऐसा लिखा गया है कि रावण का जन्म एक शाप की वजह से हुआ था। 

1 दिन कैकसी ने अपने पति से अपने सेवा के फल के रूप में वरदान में देवताओं से भी ज्यादा शक्तिशाली और देवताओं को भी हराने वाला अद्भुत संतान को मांग लिया, जिसके बाद कैकसी के वरदान को पति ने पूरा कर दिया। इसके बाद कईकसी ने अद्भुत बालक को जन्म दिया जिसके 10 सिर और 20 हाथ थे और ग्यारवें दिन उस बालक का नाम रावण रखा गया।

रावण, बचपन से ही बहुत ज्ञानी थे और विद्यावान थे। बचपन से ही रावण ने चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इसके अलावा रावण ने बेहद कम उम्र में ही आयुर्वेद, ज्योतिष और तंत्र विद्या सीख ली थी। इसके बाद युवा होते ही रावण ने जंगल में जाकर तपस्या करने की ठान लिया। 

तब रावण को पता था कि उनके परदादा ब्रह्माजी है। इस वजह से उन्होंने कई वर्षों तक उनकी घोर तपस्या की और इस तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने रावण को वरदान मांगने को कहा, तब रावण ने अजर अमर होने का वरदान मांगा। फिर ब्रह्मा जी ने कहा कि, यह मैं नहीं कर सकता हूं। लेकिन मैं तुम्हें कोई तरह की अद्भुत शक्तियां प्रदान कर सकता हूं। परंतु मैं कभी भी तुम्हें अजर अमर होने का वरदान नहीं प्रदान कर सकता, तुम ज्ञानी हो तुम्हें यह समझना होगा। इसके बाद ब्रह्मा जी ने रावण को अद्भुत शक्तियां वरदान में दे दिया और उसके बाद रावण भगवान शिव जी की घोर तपस्या करने चले गए।

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